शतचंडी यज्ञ राम कथा का सप्तम दिवस वेदांत आश्रम में : NN81

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शतचंडी यज्ञ राम कथा का सप्तम दिवस वेदांत आश्रम में : NN81

08/01/2024 | January 08, 2024 Last Updated 2024-01-08T05:52:13Z
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 विदिशा लोकेशन गंजबासौदा 

संवाददाता संजीव शर्मा



स्लगन--- शतचंडी यज्ञ राम कथा का सप्तम दिवस वेदांत आश्रम में




गंजबासौदा समायोजित विराट शतचंडी महायज्ञ व श्री राम कथा के सप्तम दिवस में जगद्गुरु अनंतानंद द्वाराचार्य डॉ राम कमल दास वेदांती जी महाराज ने आश्रम परिसर में चल रहे शतचंडी महायज्ञ व श्री राम कथा के सप्तम दिवस में, शिव चरित्र में, भगवान शिव जी के अद्भुत महिमा का वर्णन करते हुए शिव विवाह का दृश्य उपस्थित किया। उन्होंने बताया कि धर्म संपूर्ण मानवता को एक सूत्र में बांधता है । धर्मनिष्ठ प्राणी कभी भी दूसरे को दुख नहीं पहुंचाता भले ही उसे खुद ही कष्ट क्यों ना उठाना पड़े। भगवान राम का सीता रूप धारण कर परीक्षा लेने वाली सती जी ने अपने पिता के यज्ञ में शरीर त्याग कर दिया था। शरीर त्याग करने के पहले उन्होंने भगवान राम से यह वरदान मांगा कि वे धरती पर जन्म लेकर पुनः भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त कर सकेंगी। सनातन संस्कृति में पति और पत्नी का साथ अनेकों जन्मों का होता है। इसलिए हमारे रामायण शिव और पार्वती के चरित्र के माध्यम से यह बताते है। कि हमें अपने संपूर्ण परिवार को विश्वास के माध्यम से सदैव एक सूत्र में बांधे रखना चाहिए। पति-पत्नी का परस्पर विश्वास ही घर गृहस्थी को मजबूत बनाता है।


पार्वती जी ने भगवान शिव को पुनः पति के रूप में प्राप्त करने हेतु तपस्या की। उनकी तपस्या की परीक्षा लेने के लिए भगवान शिव ने सप्तऋषियों को उनके पास भेजा। सप्तर्षियों ने उनकी परीक्षा लेते हुए जब उनके गुरु और इष्ट देव की निंदा की तो पार्वती जी ने कहा कि मुझे भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए करोड़ों जन्म ही क्यों ना लेना पड़े तो भी मैं जन्म जन्मों तक शिव को ही प्राप्त करने की प्रार्थना करती रहूंगी। साथ ही उन्होंने अपने गुरु महर्षि नारद जी में श्रद्धा दर्शाते हुए उन सप्त ऋषियों से कहा कि मैं अपने गुरु के उपदेशों का ही अनुपालन करूंगी भले ही भगवान शिव ही आकर क्यों ना मना कर दें । जिस प्राणी की अपने सद्गुरु व ईश्वर में विश्वास होता है वह सफलता के उत्कृष्ट शिखर को प्राप्त करता है तदुपरांत भगवान शिव की बारात का बड़े सुंदर ढंग से वर्णन करते हुए स्वामी श्री वेदांती जी ने कहा, दूल्हा के रूप में भगवान शिव बैल पर सवार होकर विवाह मंडप में गए। हिंदू संस्कृति में बैल को धर्म का प्रतीक माना गया है। अतः जो लोग धर्म में स्थित होकर गृहस्थी को चलाते हैं उनका गृहस्थ जीवन सुखमय होता है।

परिवार बिखरने नहीं पाता ।कथा के अंत में भगवान शिव की बारात का बैंड बाजे के साथ कथा पंडाल में स्वागत किया गया। इंदौर से आए विशिष्ट कलाकारों ने अपनी मनमोहक शिव पार्वती झांकी के साथ साथ राधा कृष्ण सखियों के रूप धारण कर अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया। जिससे श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। पूज्य स्वामी वेदांती जी महाराज जी संग झांकियों के साथ अनेक तीर्थ स्थलों से आए संतों ने कथा मंच पर ही फूलों की होली खेली आश्रम के महंत हरिहर दास जी ने शतचंडी महायज्ञ का आज उज्जैन से आए तथा आश्रम के विद्वान आचार्य के साथ पंचांग पूजन, मंडप प्रवेश के साथ यज्ञ कुंड में अग्नि स्थापन कर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए यज्ञ का शुभारंभ किया।

यज्ञ स्थल में विराजमान नव देवियों की अत्यंत मनोहारी झांकी श्रद्धालुओं के मन को बरबस अपनी ओर खींच ले रही है।