संवाददाता अनिल मालवीय लोकेशन हरदा एमपी
झिरपी – शिक्षा के अधिकार की हकीकत से परदा उस समय उठा जब झिरपी गांव के सरकारी विद्यालय का दौरा करने पहुंची मीडिया टीम को रास्ते में देखकर शिक्षक वापस गांव पहुंचकर स्कूल को खोला गया
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, स्कूल मैं पांच शिक्षक हैं जिसमें तीन स्थाई और दो अतिथि शिक्षक है जो की स्कूल के समय एक या दो ही शिक्षक पाया गया बाकी अनुपस्थित पाए गए और छात्र पढ़ाई की बजाय घरेलू कार्यों में जुटे हुए थे। मीडिया के कैमरे जैसे ही गांव में पहुंचे, हड़कंप मच गया। आनन-फानन में स्कूल का दरवाजा खोला गया, लेकिन तब तक तस्वीरें हकीकत बयां कर चुकी थीं।
गांववासियों ने बताया कि यह कोई पहली बार की घटना नहीं है। अक्सर शिक्षक स्कूल नहीं आते और बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होती है। कई बार शिकायतें करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल:
इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या ग्रामीण इलाकों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना सिर्फ एक कागजी वादा बनकर रह गया है?
मांग उठी कार्रवाई की:
गांव के लोगों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि दोषी शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और बच्चों को उचित शिक्षा दिलाने के लिए स्थायी निगरानी तंत्र बनाया जाए।
वाइट संकुल प्राचार्य कैलाश ठाकुर
,मीडिया के द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी