कोरबा से अजय तिवारी की रिपोर्ट
यह दिवस हमें यह सिखाता है कि सर्प भी इस पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनकी सुरक्षा उतनी ही जरूरी है जितनी किसी अन्य प्राणी की।
बालको, कोरबा के टीनू आनंद पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से सर्पों का सफल रेस्क्यू कर रहे हैं। अब तक हजारों सर्पों को उन्होंने बालको, कोरबा एवं आस-पास के गांवों से सुरक्षित बचाकर जंगल में छोड़ा है। उनका मूल उद्देश्य है —
"सर्पों की रक्षा इंसानों से और इंसानों की रक्षा सर्पों से करना।"
टीनू आनंद बताते हैं कि सर्प रेस्क्यू का कार्य जितना आसान दिखता है, असल में यह उतना ही जोखिम भरा और कठिन होता है। 24 घंटे सेवा के लिए तत्पर रहना और कभी भी बाहर जाने से पहले यह सोचना कि कहीं किसी का रेस्क्यू कॉल न आ जाए — यही उनकी दिनचर्या बन चुकी है।
उन्होंने यह भी साझा किया कि दो बार उन्हें सर्पदंश भी हुआ, जिनमें से एक बार कोबरा के विष का गंभीर प्रभाव पड़ा और उन्हें ठीक होने में एक महीने से अधिक का समय लग गया। इसके बावजूद, उन्होंने उस कठिन समय में भी सर्प रेस्क्यू का कार्य बंद नहीं किया।
भारत में सर्पदंश की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में कोरबा में एक 5 वर्षीय बालिका की मृत्यु सर्पदंश के कारण हुई। इस पर टीनू आनंद अपील करते हैं कि सर्पदंश की स्थिति में कभी भी झाड़-फूंक जैसे अंधविश्वास में न पड़ें, और तुरंत जिला अस्पताल जाकर इलाज करवाएं।
टीनू आनंद द्वारा कई वर्षों से गांव-गांव में जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। कई बार पुलिस विभाग के सहयोग से भी यह अभियान चलाया गया है। वे 112 इमरजेंसी सेवा टीम का भी आभार व्यक्त करते हैं, जो समय पर उन्हें गांव तक ले जाकर सर्प रेस्क्यू कार्य में सहायता करती है।
मानसून के मौसम में टीनू आनंद सभी से विशेष सावधानी बरतने की अपील करते हैं —
जूते-चप्पल पहनने से पहले अच्छे से जांच लें
कार व स्कूटी स्टार्ट करने से पहले ध्यान से देखें
घर में सफाई बनाए रखें और चूहों व मेंढकों को आने से रोकें, क्योंकि ये सर्पों को आकर्षित करते हैं।