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“रक्षा सूत्रों में बंधा राष्ट्रप्रेम” — बेमेतरा की नारियों ने भेजीं 6000 राखियाँ देश के वीर जवानों के नाम - NN81


लोकेशन बेमेतरा छत्तीसगढ़ 

संवाददाता परमेश्वर यादव 

बेमेतरा 23 जुलाई 2025:-

रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जहां हर बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने की तैयारी में है, वहीं छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और स्वयं सहायता समूहों की हजारों महिलाओं ने एक अनोखा और प्रेरणादायी कार्य किया है, उन्होंने देश की सीमाओं पर तैनात 6000 से अधिक वीर जवानों के लिए राखियाँ भेजीं, जिनमें बंधा है अपार स्नेह, सम्मान और राष्ट्रभक्ति।

यह अभियान महिला एवं बाल विकास विभाग, बेमेतरा के मार्गदर्शन में चलाया गया। राखियाँ हाथों से बनाई गईं, उन्हें प्यारे संदेशों और शुभकामनाओं के पत्रों के साथ सम्मानपूर्वक पैक किया गया। हर एक राखी, एक बहन के दिल की आवाज़ बनकर वीर सैनिकों तक पहुँचेगी,  यह संदेश लेकर कि वे केवल वर्दीधारी नहीं, बल्कि हर घर के बेटे और हर बहन के भाई हैं।


 देश की सरहदों पर तैनात भाईयों के लिए हमारी राखियाँ और दुआएँ

बेमेतरा सेक्टर कंतेली की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संगीता वर्मा ने भावुक होकर कहा की हमारी तरफ से उन भाइयों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ जो दूर सरहद पर हमारी रक्षा कर रहे हैं। यह राखी उनके साहस और बलिदान को हमारा नमन है। वे सुरक्षित रहें, यही हमारी दुआ है।

वहीं सहायिका संतोषी साहू (वार्ड 15) ने अपने पत्र में लिखा की आप हमारे लिए सिर्फ सैनिक नहीं, परिवार का हिस्सा हैं। यह राखी सिर्फ धागा नहीं, हमारी आत्मीयता और आशीर्वाद का प्रतीक है।"


यह केवल राखियाँ नहीं, नारीशक्ति का राष्ट्र के प्रति समर्पण है

इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री चंद्रबेश सिंह सिसोदिया ने कहा की यह पहल केवल रक्षा सूत्र भेजने तक सीमित नहीं है। यह नारीशक्ति की राष्ट्रभक्ति, भावनात्मक एकजुटता और सम्मान का प्रतीक है। बेमेतरा की महिलाओं ने यह दिखाया कि देशभक्ति केवल बंदूक या वर्दी से नहीं, बल्कि स्नेह, त्याग और भावना से भी प्रकट की जा सकती है। इस अभियान को विभागीय अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला। पूरे जिले में इस पहल ने एक सकारात्मक ऊर्जा और गर्व का माहौल निर्मित किया है।


बेमेतरा की बहनों का यह संदेश देश के हर कोने में गूंजे

इस रक्षाबंधन पर जब देशभर में भाई-बहन के रिश्ते को बांधने वाली राखियाँ बांधी जाएंगी, तब बेमेतरा की महिलाओं द्वारा भेजी गई राखियाँ सीमाओं पर तैनात सैनिकों की कलाई पर बंधकर उनके मनोबल को और ऊँचा करेंगी। यह प्रमाण है कि जहाँ बहन का प्यार होता है, वहाँ कोई दूरी मायने नहीं रखती। इस प्रयास ने यह साबित कर दिया कि सच्चा राष्ट्रप्रेम केवल शब्दों में नहीं, कर्मों में झलकता है और इस बार वह प्रेम राखी के धागों में बंधकर सीमाओं तक जा पहुँचा है।

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