रिपोर्टर,, दरबार सिंह ठाकुर
तहसील,, देपालपुर जिला इंदौर एमपी
देह व्यापार, महिला शोषण और सामाजिक विघटन के आरोपों के साथ ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी को सौंपी लिखित शिकायत, पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में
इंदौर जिले के देपालपुर तहसील अंतर्गत नेवरी गांव के ग्रामीणों ने आगरा रोड पर संचालित एक अवैध शराब दुकान के विरुद्ध गंभीर आरोपों के साथ शिकायत दर्ज कराते हुए प्रशासन से तत्काल अवैध दुकान बंद कर उचित कार्यवाही की मांग की है। ग्रामवासियों द्वारा अनुविभागीय पुलिस अधिकारी देपालपुर को प्रस्तुत ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि शराब ठेकेदार अशोक राय ने गाँव की सीमा से लगे गौरा मंदिर–भैरव मंदिर के समीप एक अवैध शराब दुकान खोल कर रखी है, जो सामाजिक विघटन, महिला उत्पीड़न और गैरकानूनी गतिविधियों का केंद्र बन चुकी है।
ग्रामीणों का आरोप — शराब के नाम पर अनैतिक गतिविधियों का अड्डा बना अवैध दारू का ठिया
ग्रामीणों के अनुसार, उक्त शराब दुकान पूरी तरह गैरकानूनी रूप से संचालित की जा रही है। विशेष बात यह है कि गाँव नेवरी में वैध रूप से शराब बिक्री प्रतिबंधित है, फिर भी मुख्य मार्ग पर ठेकेदार द्वारा खुलेआम अवैध रूप से शराब की बिक्री की जा रही है।
शिकायत में यह भी बताया गया है कि ठेके पर पांच महिलाओं को बैठाया गया है, जिनसे न केवल शराब बिक्री करवाई जा रही है, बल्कि वहां देह व्यापार जैसी आपत्तिजनक गतिविधियों का संचालन भी हो रहा है। शराब पीने आने वाले ग्राहकों से ये महिलाएं पैसे लेकर अवैध सेवा प्रदान करती हैं, जिससे क्षेत्र का सामाजिक माहौल विषाक्त हो गया है।
महिलाएं खेतों तक जाने से डरती हैं, गाँव में तनाव का माहौल
ग्रामवासियों का कहना है कि इस अवैध शराब दुकान के कारण क्षेत्र में असामाजिक तत्वों की भीड़ जमा रहती है। ठेके पर बैठी महिलाओं के कारण महिलाओं का खेतों में जाना असुरक्षित हो गया है, जिससे ग्रामीण महिलाएं खेती-किसानी से भी वंचित हो रही हैं। इसके चलते गाँव में रोष और असंतोष व्याप्त है और स्थिति विस्फोटक बनती जा रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उक्त दुकान को शीघ्र नहीं हटाया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
प्रशासनिक निष्क्रियता और संरक्षण का आरोप
इस मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि क्षेत्रीय आबकारी निरीक्षक श्री मनीष राठौर द्वारा हाल ही में उक्त स्थान पर रूटीन चेकिंग की गई थी, जिसमें दर्जनभर पेटियों में रखी देशी और विदेशी शराब, बियर की बोतलें एवं अनाधिकृत व्यक्तियों की मौजूदगी वीडियो और फोटो में स्पष्ट रूप से दर्ज हुई। बावजूद इसके, आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के अंतर्गत कोई विधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया गया और ठेकेदार को केवल मौखिक हिदायत देकर छोड़ दिया गया।
जैसे ही अधिकारी लौटे, अवैध शराब बिक्री पुनः चालू हो गई, जिससे यह संदेह प्रबल हो गया है कि अधिकारी और ठेकेदार की मिलीभगत के चलते यह कारोबार निर्बाध रूप से चल रहा है।
कानूनी दृष्टिकोण से स्थिति अत्यंत गंभीर
मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के अनुसार बिना लाइसेंस शराब का संग्रहण, विक्रय या परिवहन दंडनीय अपराध है, जिसमें जेल और आर्थिक दंड दोनों का प्रावधान है। इसके बावजूद जब प्रकरण पूरी तरह दस्तावेजों, वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर स्पष्ट है, फिर भी ठेकेदार के विरुद्ध प्रकरण न बनाना प्रशासनिक पक्षपात और शिथिलता को दर्शाता है।
क्या कहता है प्रशासन?
जिला आबकारी अधिकारी द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। जब उनसे संपर्क किया गया तो उन्होंने “कार्यवाही करेंगे” कहकर परंपरागत उत्तर दिया।
अब प्रश्न यह है कि—
क्या सरकार का नशामुक्ति अभियान केवल औपचारिकता है?
क्या ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से ग्रामीण समाज को विकृत करने की छूट दी जा रही है?
क्या ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से लेकर वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी?
नेवरी गाँव के लोग आज अपनी नारी सुरक्षा, सामाजिक मर्यादा और क्षेत्रीय शांति के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अवैध शराब दुकान उनके लिए केवल एक व्यापार नहीं, बल्कि अस्तित्व का संकट बन चुकी है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन साहसिक और निष्पक्ष कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी फाइलों और बयानों के बोझ तले दबा रह जाएगा।