संवाददाता कृष्णा कुमार
छत्तीसगढ़ बीजापुर।गंगालूर से मिरतुर तक बन रही सड़क परियोजना में भारी भ्रष्टाचार की गूंज अब कार्रवाई के स्तर तक पहुंच चुकी है। इसी मामले में बीजापुर पुलिस ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के 5 अधिकारियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो सेवानिवृत्त कार्यपालन अभियंता (EE), एक वर्तमान EE, एक SDO और एक सब-इंजीनियर शामिल हैं। गिरफ्तारी की पुष्टि खुद जिले के पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव ने की है। यह गिरफ्तारी पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या की विशेष जांच (SIT) के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर की गई है। सभी आरोपियों को दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है और उनसे लगातार पूछताछ जारी है।
पत्रकार मुकेश चंद्राकर ने गंगालूर-मिरतुर सड़क निर्माण में गड़बड़ियों और अनियमितताओं को उजागर किया था। उनकी रिपोर्टिंग के कारण ही वे कुछ प्रभावशाली और भ्रष्ट तंत्र की आंख की किरकिरी बन गए। 1 जनवरी की रात वे रहस्यमयी ढंग से लापता हो गए थे और 3 जनवरी को उनका शव चट्टनपारा बस्ती में एक सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ — वह टैंक उनके रिश्तेदार और ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के मजदूरों के लिए बनाए गए बाड़े में था।
इस मामले में पुलिस पहले ही ठेकेदार सुरेश चंद्राकर, उनके भाइयों रितेश और दिनेश चंद्राकर, तथा सुपरवाइज़र महेंद्र रामटेके को गिरफ्तार कर चुकी है। सुरेश को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया था। SIT की जांच में खुलासा हुआ कि 2010 में स्वीकृत 73.08 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ। घटिया निर्माण कार्य और अधिकारियों की मिलीभगत के स्पष्ट प्रमाण मिले। मुकेश चंद्राकर ने इन्हीं अनियमितताओं को अपनी रिपोर्टिंग में उजागर किया था।
मुकेश चंद्राकर सिर्फ एक पत्रकार नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने वाले एक निर्भीक आवाज थे। उन्होंने नक्सल प्रभावित और संवेदनशील इलाके बीजापुर में रहकर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ लगातार रिपोर्टिंग की। सोशल मीडिया और वीडियो पोर्टल्स के माध्यम से उन्होंने कई जनहित के मुद्दों को उठाया।
अप्रैल 2021 में टकलगुड़ा माओवादी हमले के बाद, जब कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह मन्हास माओवादियों की गिरफ्त में थे, उस समय उनकी रिहाई में भी मुकेश ने अहम भूमिका निभाई थी। मुकेश चंद्राकर की हत्या सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि सच को सामने लाने की उस जिद की हत्या थी, जो भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ खड़ी थी। उनकी शहादत पत्रकारिता जगत और लोकतंत्र दोनों के लिए अपूरणीय क्षति है।