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एनीकट में डूबे दोनों किशोरों का शव बरामद, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, दूसरा शव ढूंढने में करनी पड़ी मशक्कत - NN81


रिपोर्टर:कृष्णा कुमार


सूरजपुर छत्तीसगढ़/सूरजपुर जिले के बिश्रामपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत रामनगर पंचायत के मोहरा एनीकट में बुधवार की दोपहर 2 किशोर अपने दोस्तों के साथ नहाने गए थे। इसी दौरान दोनों गहरे पानी की ओर चले गए और डूब जाने से उनकी मौत हो गई थी। दोनों का शव शाम तक नहीं मिल पाया था। डीडीआरएफ की टीम द्वारा गुरुवार की सुबह फिर रेस्क्यू शुरु किया गया। करीब 8.30 बजे अविनाश देवांगन का शव मिला। वहीं भानू निषाद का शव खोजे जाने की मशक्कत चल रही थी। दोपहर करीब 3 बजे उसका भी शव बरामद कर लिया गया। दोनों किशोरों की मौत से उनके परिजनों में मातम पसरा हुआ है।


सूरजपुर के भट्ठापारा निवासी अविनाश देवांगन पिता सुशील उर्फ बबलू देवांगन 15 वर्ष और भानु निषाद पिता कन्हैया निषाद 15 वर्ष बुधवार की दोपहर मोहरा एनिकट में अन्य दोस्तों के साथ नहाने गए थे। नहाने के दौरान दोनों गहरे पानी में पड़े भंवर में उलझ गए और डूबने लगे। दोनों को डूबते देख दोस्तों ने शोर मचाया।


जब तक कोई वहां पहुंच पाता, दोनों की डूबकर मौत हो चुकी थी। सूचना मिलते ही पुलिस और परिजन मौके पर पहुंचे। पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। देर शाम तक तलाश जारी रही, लेकिन दोनों का कोई सुराग नहीं मिल पाया। अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा। गुरुवार की सुबह फिर रेस्क्यू शुरू हुआ।

सूरजपुर की डीडीआरएफ टीम जिला सेनानी संजय गुप्ता के मार्गदर्शन में मौके पर पहुंची। टीम प्रभारी बीरबल गुप्ता की अगुवाई में बृज बिहारी, कृष्ण सिंह, धनसाय, नेमसाय, तुलेश्वर, शिव प्रताप मार्को, देवनारायण, शिवनारायण, विदेश, त्रिनेत्र सिंह समेत पूरी टीम ने तलाशी अभियान चलाया।


साढ़े 6 घंटे बाद मिला दूसरे किशोर का शव

सुबह करीब साढ़े 8 बजे अविनाश का शव पानी से बाहर निकाला गया, जबकि भानू का शव ढूंढने में डीडीआरएफ की टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। अविनाश का शव मिलने के करीब साढ़े 6 घंटे बाद दोपहर 3 बजे भानू का शव बरामद किया गया। इसके बाद शवों को पीएम के लिए अस्पताल भिजवाया गया। पीएम पश्चात शव परिजन को सौंप दिया गया।


पानी में बने भंवर से हुई शव खोजने में परेशानी

रेस्क्यू टीम के प्रभारी बीरबल गुप्ता ने बताया कि घटना स्थल पर पानी का बहाव अत्यधिक था और नीचे भंवर बन रहा था, जिसने बच्चों को बाहर निकलने का कोई मौका ही नहीं दिया। यही भंवर तलाशी अभियान में भी सबसे बड़ी चुनौती बना। रेस्क्यू के दौरान बिश्रामपुर और सूरजपुर क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या पहुंचे हुए थे।

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