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जलमग्न हुआ नगर पालिका का कारनामा - NN81



एमसीबी (छ.ग.)

रिपोर्ट - मनीराम सोनी 

 एमसीबी /मनेंद्रगढ़ नगर पालिका में भ्रष्टाचार की एक और परत उजागर अप्रैल माह में नगर पालिका द्वारा एक तालाब निर्माण / गहरीकरण  का काम बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के शुरू करवा दिया गया । हम ऐसा सिर्फ इसलिए कह रहे हैं कि यह सारी बातें लोगो  का कहना              लगभग  लाखों  रुपये की लागत का यह काम न नियमों का पालन करता दिखा, न गुणवत्ता का। लीपा पोती कर जैसे-तैसे कराए गए निर्माण कार्य कर सारी गंदगी तालाब के ऊपर ही एकत्रित कर दी गई जिस वार्ड वासियों को बहुत ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है  जुलाई की पहली बारिश ने खोल दी ‘घोटाले’ की पोल सूत्रों से जिस तालाब को साफ सफाई गहरीकरण को लेकर कर कार्य कराए गए थे  और वही तालाब का पूरा मलमा तालाब के बाउंड्री बाल के चारों साइड रख दिया गया था जिस कारण दबाव से  करोड़ों की बाउंड्री वॉल ध्वस्त हो गई ज़मीन पर टिक न सकी। नतीजा – जनता की आंखों के सामने ‘कागजी विकास’ ढह गया बड़े सवाल जो अब खड़े हो रहे हैं 

बिना टेंडर के काम कैसे शुरू हुआ किसी मद से कार्य हुए व इन कार्यों में किस मद का पैसा खर्च किया गया  किन अधिकारियों ने इसे स्वीकृति दी किस ठेकेदार को लाभ पहुंचाने की मंशा थी क्या इसमें राजनीतिक या प्रशासनिक मिली भगत है ? प्रशासन की चुप्पी और जवाबदेही का टोटा

इस पूरे मामले में अब तक न तो नगर पालिका का कोई जवाब आया है और न ही कोई जांच हुई है । इससे यह स्पष्ट होता है कि नगर पालिका में काम नहीं, खेल चल रहा है — और जनता सिर्फ  मुक दर्शक बनकर रह गई है। इससे स्थानीय लोगों में आक्रोश

जनता का कहना है कि इस घोटाले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए एक वार्ड वासी का कहना है की हमारे टैक्स के पैसे से यह तनख्वाह भी लेते हैं और इस टैक्स के पैसे से निर्माण कार्य भी कराया जाता है इस तरह का कार्य कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार गवाही देता है और संबंधित इसमें कुछ बोलना भी नहीं चाहते हैं  प्रशासन नींद से जागेगा? या  मनेंद्रगढ़  में ऐसे ही  भ्रष्टाचार का  खेल का खेला कर दिया जाएगा  एक वार्ड वासी नाम ना बताने की सर्त में जानकारी दी है की  तालाब निर्माण स्थल पर जान बूझकर जेसीबी चलाया गया जिससे बाउंड्री वॉल गिरे  और इस प्रकृति आपदा का  हवाला देकर पुनः कागजों में भ्रष्टाचार  खेल का खेला कर जाए लोगों का कहना है कि यह कार्य भ्रष्टाचार छुपाने और सबूत मिटाने की कोशिश हो सकती है।

स्थानीय प्रशासन अब भी मौन है, जबकि जनता में भारी आक्रोश है। नगर पालिका के संबंधित अधिकारियों से कुछ पत्रकारों द्वारा चाहे वह आर टी आई का माध्यम हो चाहे वह मौखिक हो  फिर चाहे शिकायत ही क्यों ना हो संबंधित अधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार से कोई भी जवाब देना मुनासिब नहीं समझा जाता है सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि एक सफेदपोश धारी बाहरी व्यक्ति सारे कामों में इंटरफेयर करता है और यह भी जानकारी   चर्चा का विषय है कि यदि पत्रकारों द्वारा समाचार प्रकाशित किया जाता है य आर टी आई लगाकर जानकारी मांगी जाती है तंत्र हमारे साथ है  तो कुछ के ऊपर झूठी शिकायत दर्ज करा दी जाएगी.तो सब शांत हो जायगे  सोचने वाली बात यह है की  यह अभिकर्ता अपना कार्यालय संगठन चला रहे जो सिर्फ जनता की सेवा करने के लिए बैठे हुए  ना कि जनता उनके ऊपर हिटलर शाही  हुकूमत चलाने के लिए यह यहां के मूल निवासियों का कहना है                           l

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