न्यूज़ नेशन 81 झोतेश्वर गोटेगाँव नरसिंगपुर मप्र संजय साहू
गोटेगांव स्थित परमहंसी गंगा आश्रम में ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज का 101वां जन्मोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के बीच ऐतिहासिक गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। हजारों श्रद्धालु इस महोत्सव के साक्षी बने।
प्रातःकालीन पूजन और शिव अभिषेक
भोर से ही आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
समाधि मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान रूपेश्वर महादेव का भव्य शिव अभिषेक किया गया।
मां राजराजेश्वरी त्रिपुरसुंदरी मंदिर में लक्ष्य अर्चन एवं 108 सुहासिनी पूजन सम्पन्न हुआ।
पांडे परिवार ने समाधि मंदिर में लड्डुओं से अर्चन एवं पंचमेवा की माला अर्पित की।
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती हॉस्पिटल ट्रस्ट के माध्यम से निःशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन हुआ।
श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब और भंडारा
गुरुदेव की समाधि पर पूजन-अर्चन करने श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।
अन्न क्षेत्र, त्रिपुरालय, संस्कृत पाठशाला और मंदिर प्रांगणों में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
ब्रम्हचारी गणों द्वारा लड्डुओं से किया गया सहस्त्रार्चन
इस पावन अवसर की मंगल बेला पर ब्रम्हचारी श्री अचलानन्द जी के यजमानत्व में ब्रह्मचारी श्री दिव्यानन्द जी द्वारा 10:30 बजे से श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में, ब्रह्मचारी श्री निर्विकल्प स्वरूप जी द्वारा 11:00 बजे से श्री सर्व सिद्धि हनुमान लला सह नवग्रह मंदिर में एवं ब्रह्मचारी श्री अचलानंद जी द्वारा 11:30 बजे से श्री नित्या मंदिर विराजमान श्री महागणपति भगवान का लड्डुओं से सहस्त्रार्चन किया गया।
विशिष्ट अतिथि और वक्तव्य
समारोह में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति, केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, पूर्व राज्य मंत्री जालम सिंह पटेल, विधायक महेंद्र नागेश, अनेक संत-महात्मा और आचार्य महामंडलेश्वर उपस्थित रहे।
नेताओं और संतों ने एक स्वर से कहा कि “गुरुदेव ने धर्म, गंगा और गौ रक्षा के लिए जो जीवन समर्पित किया, वही आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।”
आचार्य महामंडलेश्वर –
“गुरुदेव सनातन संस्कृति के सच्चे प्रहरी और धर्म का आधार स्तंभ थे।”
नर्मदा प्रसाद प्रजापति
“गुरुदेव ने सामाजिक एकता और धार्मिक जागरण दोनों को मजबूत किया।”
सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते
“स्वरूपानंद जी का जीवन धर्म और राष्ट्र सेवा की अमूल्य धरोहर है।”
जालम सिंह पटेल
“गुरुदेव ने हर पीढ़ी को धर्म आधारित जीवन जीने की प्रेरणा दी।”
महेंद्र नागेश विधायक
“गुरुदेव की शिक्षाएँ समाज की सबसे बड़ी पूंजी हैं।”
निजी सचिव ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद
“धर्म सेवा ही राष्ट्र सेवा है यही गुरुदेव का अमर संदेश है।”
पूज्य शंकराचार्य जी महाराज का प्रवचन
इस अवसर पर द्वारका शारदा पीठाधीश्वर पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने भक्तों को आशीर्वचन प्रदान किए।
उन्होंने कहा – “गुरुदेव स्वरूपानंद सरस्वती जी ने अद्वैत वेदांत के सिद्धांतों को केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें समाज जीवन में उतारा। गंगा, गौ और धर्म रक्षा के लिए जो आंदोलन उन्होंने चलाए, वे सनातन धर्म की आत्मा को पुनः जागृत करने वाले थे।”
उन्होंने आगे कहा “आज जब हम उनका जन्मोत्सव मना रहे हैं, तो यह केवल उत्सव नहीं, बल्कि एक संकल्प का दिन है कि हम भी धर्म और राष्ट्र रक्षा के उनके अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाएँ।”
प्रवचन के अंत में उन्होंने शिव महिमा का वर्णन करते हुए कहा “गुरुदेव का जीवन स्वयं भगवान शंकर की भांति त्याग, तप और करुणा का प्रतीक था। जैसे भगवान शंकर समस्त लोकों का कल्याण करते हैं, वैसे ही गुरुदेव ने सदैव धर्म और जनकल्याण के लिए अपना जीवन अर्पित किया।”
शोभायात्रा और दीपोत्सव
दोपहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बैंड-बाजों, डोल-नगाड़ों और वैदिक घोषणाओं के बीच श्रद्धालु नाचते-गाते चले।
संध्या को पूरे आश्रम परिसर में दीपोत्सव मनाया गया। दीपों की श्रृंखला से वातावरण दैदीप्यमान हो उठा।
श्रद्धालुओं की भावनाएँ
“गुरुदेव की समाधि पर पूजन और शिव अभिषेक से आत्मा को शांति मिली।”
“पूज्य शंकराचार्य जी का प्रवचन सुनकर ऐसा लगा मानो स्वयं स्वरूपानंद जी महाराज हमें धर्मपथ दिखा रहे हों।”
समापन
पूरे दिन परमहंसी गंगा आश्रम में धर्म, भक्ति, सेवा और अध्यात्म का संगम देखने को मिला। शिव अभिषेक, अनुष्ठान, शोभायात्रा, दीपोत्सव और पूज्य शंकराचार्य जी के प्रवचन ने इस जन्मोत्सव को एक ऐतिहासिक अध्याय बना दिया।